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Oct 15, 2025

Vartika Nanda Poetry

 अजब संयोग है या दुर्योग

छूटी हुई प्रार्थनाएं याद आती हैं

तीर्थों में छोड़ आई थी उन्हें

लगा था – वे सुरक्षित रहेंगी और अपनी उम्र पा लेंगी

पानी पर लकीरें ही थीं

किसी की याद में आ गई हिचकियां

कोई थपकी ही थी किसी और छोर की

प्रार्थनाएं सच हों, यह अनिवार्य कहां

फिर भी फरेब की चोट से

टूट चुकी लकीरें भी

खुद में समाए रखती हैं – प्रार्थनाएं। 


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