Jan 16, 2022
Apr 14, 2021
Mar 29, 2021
Mar 21, 2021
Prison Radio in Haryana: Phase 2: Front page story in Dainik Jagran
Courtesy: Dainik Jagran
Prison Radio in Haryana: Phase 2
Haryana Prisons have completed second
phase of Radio Presentation Skill Program with 26 inmates being trained as
Radio Jockeys.
This story was published in the Times of India.
Courtesy: Times of India
Feb 24, 2021
Prison Radio in Haryana
May 9, 2020
Tinka Jail Research: For inmates in UP, telephones are the new life line
Press Release
For jail inmates in UP, telephones are the new life lineHighest increase in the District Jails of Lucknow and Gautam Buddha NagarWomen inmates are also being given the facility
Survey included nearly 16,000 inmates of 5 jails of UP
Telephones are now the only window of communication for inmates lodged in the jails of Uttar Pradesh. Due to the existing Covid-19 threat resulting in lockdown, visitations have been stopped in all jails across India. The only way of communicating and connecting with the outside world available to inmates is through telephones and they are finding solace through this technology.
After the ban, 69 jails of Uttar Pradesh have introduced the phone call facility for inmates, free of cost. The survey selected 5 jails of Uttar Pradesh, namely Central Jail, Naini (Central Jail), Lucknow (District Jail) Agra (District Jail), Ghaziabad (District Jail) and Gautam Budhha Nagar (District Jail). All these 5 jails are representative jails of Uttar Pradesh, the most populous state of India. These are among the largest jails of UP, have women inmates and are overcrowded too. Survey included the entire prison population of these jails, a sum total of nearly 15, 790 inmates.
This survey is conducted by Vartika Nanda,the founder of Tinka Tinka Foundation, working towards prison reforms in India. The data has been provided by Uttar Pradesh Prison Department on request. This is part of an on-going research on the communication needs of inmates with special reference to Uttar Pradesh.
This survey has revealed that the number of phone calls made has increased at least three times in the post lockdown period over the pre lockdown days in all the jails. District Jails of Lucknow and Gautam Buddha Nagar have recorded the highest increase in number of phone calls per day; increasing from 7 to 325, and from 38 to 260 respectively. This included zero calls made by women in the pre lockdown period in both these jails, and 25 and 5 respectively in the post lockdown period.
The phone density in the jails ranges from 435 inmates per phone in Lucknow District Jail to 2079 inmates per phone in Naini Central Jail.
According to Shri Anand Kumar, DG, Prisons and Correctional Reforms, Uttar Pradesh, “We were active in providing telephone facilities to inmates. Our jail staff is ensuring that everyone gets the opportunity to connect with their families.”
Vartika Nanda, founder of Tinka Tinka added. “Institutionalization of telephone calls in the Indian prisons is a step forward in augmenting communication amenities for inmates and is a part of ongoing prison reforms. From the days of communication-less jails, we have transitioned to communication-friendly jails helping reformation and healing.”
Another positive development is that women inmates who were unable to make calls in the pre lockdown phase since all the telephones were installed in the male section, are now able to make use of this facility. Uttar Pradesh Prison department has installed new phones in common areas and this has come as a welcome change for the women inmates.
While inmates are happy about this change, they feel that increase in the number of phone sets would bring more relief. Due to inadequate number of telephone sets, inmates have to wait for their turn which may range from 3 to 10 days. At present, duration of each call is limited to 2-5 minutes. Evidently, the increase in phone sets would further address the communication needs of inmates better and would reduce stress and anxiety in jails. One call a day, certainly helps keep the tension away.
May 6, 2020
तिनका तिनका यात्रा- साहित्य आज तक
कविता संकलनों में 'रानियां सब जानती हैं', 'थी. हूं..रहूंगी...' और 'मरजानी' शामिल है. 'थी. हूं..रहूंगी...' के लिए उन्हें ऋतुराज परंपरा सम्मान भी मिला. पर उनका असली सम्मान स्त्री-शक्ति पुरस्कार है, जिसे महिला सशक्तिकरण पर देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान का दर्जा हासिल है. उन्हें यह पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों मिला था. जेलों पर अपने काम की वजह से उन्हें दो बार लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया. उनके इस काम के महत्त्व का अनुमान इससे भी लगाया जा सकता है कि देश की 1382 जेलों में महिलाओं और बच्चों की अमानवीय स्थिति के बारे में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमबी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने नंदा को भी अपनी आकलन प्रक्रिया में शामिल किया. वर्तिका नन्दा ने देश की तीन जेलों के लिए परिचय गान भी लिखे हैं, जिन्हें जेल के ही बंदियों ने गाया. इसके अलावा वह जेलों पर किताबों की एक श्रृंखला तैयार कर चुकी हैं, जिनमें 'तिनका तिनका तिहाड़', 'तिनका तिनका डासना' और 'तिनका तिनका मध्य प्रदेश' उल्लेखनीय है. उनके अपने शब्दों में 'तिनका तिनका डासना' एक पत्रकार और सुधारक-दोनों के मिश्रण से जेल की जिंदगी का खाका खींचती है.
ऐसे दौर में जब कोरोना ने हमें घरों में कैद कर दिया है, तब साहित्य तक के साथ वर्तिका नन्दा अपनी पुस्तक 'तिनका तिनका डासना' के साथ जेलों की उस यात्रा पर ले जा रही हैं, जहां उनके शब्द इस बात का अहसास कराते हैं कि कैदियों, उनके परिवार और उनके रिश्तेदारों, दोस्तों, मुलाकातियों के भी अपने बुनियादी मानवीय हक हैं...तो बने रहिए साहित्य तक के साथ, किस्सा-कहानियों, सच्चाइयों और किताबों की उस अनूठी दुनिया में, जहां ज्ञान भी है, मनोरंजन भी, सीख है, तो साथ भी, संवेदना भी...क्योंकि शब्दों से, किताबों से बेहतर कोई और साथी नहीं.
मई 6, 2020
Facebook:
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You Tube:
https://www.youtube.com/watch?v=ZNrw0XZzBVc&feature=youtu.be
Apr 9, 2020
कोरोना के बीच जेल को चिट्ठी
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जेल के कैदियों के काम की सराहना करते हुए देश की जेल सुधारक वर्तिका नन्दा ने जेल के बंदियों और जेल स्टाफ के वीडियो शेयर किए.
कोरोना के चलते जब पूरा देश लॉकडाउन में है, देश की जेलें अपना योगदान दे रही हैं. मास्क, सेनिटाइजर, किट से लेकर आसोलेशन वार्ड तक बनाने में जेलों के कैदी जुटे हैं. उनके इस योगदान की सराहना करते हुए देश की जेल सुधारक वर्तिका नन्दा ने जेल के बंदियों और जेल स्टाफ के वीडियो से एक सौगात भेजी है. इसका नाम है- जेल के नाम चिट्ठी. करीब ढाई मिनट के इस वीडियो में बंदियों और स्टाफ का मनोबल बढाया गया है और उन्हें राष्ट्र-निर्माण से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया गया है.वीडियो में इस बात पर खास तौर से जोर दिया गया है कि लॉक डाउन की वजह से पहली बार लोगों को जेल जैसी जिंदगी का अहसास हुआ है जबकि जेल की परिस्थितियां इससे कहीं ज्यादा विकट हैं. वीडियो में कहा गया है कि - इस समय आप और बाहर के लोगों में कोई ज्यादा फर्क नहीं है. ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर के कई लोग खुद को जेल के बंदी जैसा ही महसूस करने लगे हैं. इससे यह उम्मीद भी की जा सकती है कि उन्हें आपकी तकलीफ का अंदाजा होगा.
देश की 1,339 जेलों में करीब 4,66,084 कैदी बंद हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, देश की जेलों में औसतन क्षमता से 117.6 फीसदी ज्यादा बंदी हैं. उत्तर प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों में यह दर क्रमश: 176.5 फीसदी और 157.3 फीसदी है. यानी भारतीय जेलें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भीड़ से लबालब हैं. कोरोना के संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस समस्या की याद दिलानी पड़ी है. यही वजह है कि पिछले दो हफ्तों में देश की जेलों से बड़ी संख्या में रिहाई हुई है.
लेकिन संकट के इस दौर में तिहाड़ से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल समेत कई राज्यों ने बाहर की दुनिया को कोरोना से बचाने के लिए सराहनीय काम किया है. य़ह वीडियो जेल के इन्हीं मददगार बंदियों के नाम है.
जेल के नाम चिट्ठी
बीते कई दिन उन सभी के लिए बहुत मुश्किल के थे जिन्होंने न जेल देखी, न समझी. कोरोना के इस लॉकडाउन के चलते बहुत से लोगों ने अपनी जिंदगी की तुलना तक जेल से कर डाली है. लेकिन इस सच को सिर्फ आप जानते हैं. कोरोना ने यह सबक भी दिया है कि जिंदगी को जानने के लिए बहत दूर तक जाने की जरूरत नहीं है. जिंदगी के बड़े सच हमारे अपने दायरे में ही हैं. दुमिया का एक बड़ा हिस्सा अब बंदिशों की जेल में है. बाहर जाना, घूमना, मिलना, सब बंद है. इन बंदिशों के बीच समाज के बहुत से लोगों को अब जब जेल से तुलना करने का ख्याल आया है, आपको इस बात को नहीं भूलना है कि आप जिन भी परिस्थितियों में यहां पर आएं हों, आपको अपने समय का सम्मान करना ही होगा. महात्मा गांधी से लेकर अरबिंदो तक- कई बड़े चिंतक इन्हीं जेलों से निखऱ कर बाहर आए और उन्होंने पूरी दुनिया में बदलाव की अलख जगा दी. आपको भी अपने अंदर की अलख को जगाना है.इस समय आप और बाहर के लोगों में कोई ज्यादा फर्क नहीं है. ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर के कई लोग खुद को जेल के बंदी जैसा ही महसूस करने लगे हैं. इससे यह उम्मीद भी की जा सकती है कि उन्हें आपकी तकलीफ का अंदाजा होगा. बाकी जेलों की तरह आपकी जेल से भी कोरोना के चलते कई बंदी रिहा किए गए हैं. आप भी कभी न कभी रिहा होंगे. प्रशासन आपकी देखभाल की कोशिश कर रहा है लेकिन इस बीच आपको इस बात को बार-बार जहन में रखना है कि आप जेल के किसी भी दिन को ज़ाया नहीं करेंगे. आप कुछ सीखेंगे, सृजन करेंगे.
इस साल तिनका तिनका अवार्ड में एक श्रेणी उन बंदियों के नाम भी रहेगी जिन्होंने संकट के इस समय में राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दिया है. आप भी इसका हिस्सा बनिए. संभव हो तो इस दौर पर आप जो भी अखबारों में पढ़ रहे हैं य टीवी पर देख रहे हैं, उस पर एक डायरी लिख दीजिए या फिर कोई पेंटिंग बनाइए या दीवारों को किसी उम्मीद से रौशन कर दीजिए. यह आप पर है कि आप अपने अंदर के कलाकार को कैसे जिंदा रखते हैं. बस, जो भी कीजिए, उसमें आपकी भी बेहतरी हो और समाज की भी.
डॉ. वर्तिका नन्दा जेल सुधारक और तिनका तिनका अभियान की संस्थापक हैं जिसका मकसद जेलों को आपस में जोड़ना और बंदियों की प्रतिभा को सामने लाते हुए जेल सुधार पर काम करना है. उनके बनाए तिनका तिनका मॉडल के तहत 2019 में ‘‘आगरा जेल रेडियो’’ की शुरुआत की गई थी जो कि कोरोना के समय बंदियों का सबसे बड़ा सहारा बन गया है. मुलाकातें बंद होने की वजह से जेल का रेडियो बंदियों के संवाद की जरूरतें पूरी कर रहा है. इस रेडियो स्टेशन का उद्घाटन जुलाई 2019 में आगरा जिला जेल के अधीक्षक शशिकांत मिश्रा और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने किया था. डॉ. नन्दा के मताबिक यह प्रयास जेलों की स्थिति पर हो रहे उनके एक विशेष शोध का भी एक हिस्सा हैं.
https://hindi.news18.com/news/nation/opinion-prison-inmates-doing-work-for-fight-coronavirus-2996704.html
Courtesy:https://hindi.news18.com/news/nation/opinion-prison-inmates-doing-work-for-fight-coronavirus-2996704.html
https://youtu.be/Qdg7Wkl55eY5eY
Dec 11, 2019
प्रचंड जनता: अखिल भारतीय तिनका तिनका इंडिया अवार्ड्स से जेलर बीएस मुकुंद हुए सम्मानित
विगत दो वर्षों में जेल की प्रशासनिक व्यवस्था में विशेष सुधार के लिए मानवाधिकार दिवस पर दिए जाने वाले तिनका तिनका अखिल भारतीय पुरस्कार से कौशाम्बी जेल के जेलर बीएस मुकुंद को लखनऊ में सम्मानित किया गया।
पुरस्कार वितरण प्रति वर्ष जेलों में सुधार के लिए मानवाधिकार दिवस के अवसर पर तिनका तिनका फ़ाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। पाँचवे अखिल भारतीय पुरस्कार के लिए कौशाम्बी के जेलर बीएस मुकुंद को चुना गया। बता दें कि मानवाधिकार दिवस पर तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स जेलों में सृजन करने वाले बंदियों और विशेष काम कर रहे जेल अधिकारियों का सम्मान करते हैं।
भारत की जानी-मानी जेल सुधारक वर्तिका नन्दा ने तिनका तिनका अवार्ड्स की शुरुआत की है। हर साल तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स चयनित बंदियों और जेल कर्मचारियों की उपस्थिति में देश की किसी जेल में जारी किए जाते हैं।
यह पुरस्कारों का पांचवा साल है। इस वर्ष 2019 में यह अवॉर्ड जेल सुधार में किए गए कार्यों के आधार पर महाराष्ट्र के समकांत चंद्रकांत शदगे, पंजाब के कपूरथला जेल के अधीक्षक सुरेंद्र पाल खन्ना, अलवर राजस्थान से भरत लाल मीणा, यूपी से पीएन पाण्डेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक लखनऊ, बीएस मुकुंद जेलर कौशाम्बी को प्रदान किया गया। इन्हें यह अवार्ड आरके सिंह जेलर बांदा, संतोष कुमार वर्मा, डिप्टी जेलर सुलखान सिंह, पूर्व डीजीपी एवं आनन्द कुमार, जेल डीजी के द्वारा देकर सम्मानित किया गया।
बता दूं कि विगत दो वर्षों से कौशाम्बी जिला कारागार, निरंतर जेल सुधार, भोजन व्यवस्था, जेल की सफ़ाई, माफिया बन्दियों पर कठोर नियंत्रण के लिये जानी जाती है। अखिल भारतीय पुरुस्कार पाने पर डीआईजी जेल बीआर वर्मा, डीएम कौशाम्बी मनीष कुमार वर्मा व एसपी कौशाम्बी अभिनंदन सिंह व पूर्व पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी प्रदीप गुप्ता ने जेल अधीक्षक को बधाई दी है।












