दिल्ली में 30-31 मई को सप्रे संग्रहालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र का आयोजन
31 मई: हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर 30-31 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय द्विशताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल के संयुक्त आयोजन में आज हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल : पुनरावलोकन- पर एक विमर्श हुआ. मंच पर मुझे प्रो. गिरीश्वर मिश्र प्रो. कृपाशंकर चौबे, डॉ. धनंजय चौपड़ा, प्रो. हरबंश दीक्षित और प्रो. उषारानी राव के सान्निध्य में अपनी बात रखने का मौका मिला. मेरा विषय था- दृश्य श्रव्य माध्यम की हिन्दी पत्रकारिता. मैं Vijay Dutt Shridhar जी, राम बहादुर राय जी Sachchidanand Joshiजी की हार्दिक आभारी हूं आज तिनका तिनका फाउंडेशन का स्थापना दिवस भी है.
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30 मई: स्मारक डाक टिकट एवं प्रथम दिवस आवरण का लोकार्पण स्मारक ग्रंथ का विमोचन और दो दिवसीय विमर्श
ऐतिहासिक पत्रों एवं कलम के पुरखों की चित्र प्रदर्शनी
भोपाल, 28 मई हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर 30-31 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय द्विशताब्दी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल के संयुक्त आयोजन में 'स्मारक डाक टिकट एवं प्रथम दिवस आवरण का लोकार्पण होगा। 'हिन्दी पत्रकारिताः 200 साल की महागाथा स्मारक ग्रंथ का विमोचन किया जाएगा। हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दी की गौरवशाली यात्रा के अग्रगण्य समाचारपत्रों और पत्रिकाओं तथा युग निर्माता संपादकों के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी अचल और सचल स्वरूप में रहेगी, जो बाद में सप्रे संग्रहालय का स्थायी अंग बनेगी।
हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी राष्ट्रीय महोत्सव के मुख्य अतिथि भारत के संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया स्मारक डाक टिकट तथा प्रथम दिवस आवरण का लोकार्पण करेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव स्मारक ग्रंथ का विमोचन करेंगे। स्मारक ग्रंथ का सम्पादन श्री विजयदत्त श्रीधर एवं डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया है। डॉ. श्रीकांत सिंह की पुस्तक 'हिन्दी पत्रकारिता के हिन्दीतर उन्नायक' का भी विमोचन होगा। महोत्सव के अध्यक्ष मूर्धन्य संपादक श्री रामबहादुर राय हिंदी पत्रकारिता के भूत-वर्तमान-भविष्य की व्याख्या अपने बीज वक्तव्य में करेंगे। शुभारंभ राष्ट्रीय कला केन्द्र के जनपथ बिल्डिंग स्थित सभागार में 30 मई को अपरान्ह 4.00 बजे होगा।
31 मई को विमर्श के दो सत्र रखे गये हैं। पहला सत्र सुबह 10.30 बजे आरम्भ होगा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफे. गिरीश्वर मिश्र अध्यक्षता करेंगे। प्रो. कृपाशंकर चौबे- 'हिन्दीतर मनीषियों का योगदान, डॉ. धनंजय चोपड़ा 'हिन्दी पत्रकारिता और जन आन्दोलन', प्रो. वर्तिका नंदा- 'दृश्य-श्रव्य माध्यम की पत्रकारित्ता', प्रो. हरवंश दीक्षित 'हिन्दी पत्रकारिताः संवैधानिक अधिकार और सरकार और प्रो. उषारानी राव 'दक्षिण भारत में हिन्दी पत्रकारिता' विषय का प्रतिपादन करेंगे। दूसरा सत्र दोपहर 2.00 बजे आरम्भ होगा। इस सत्र की अध्यक्षता राज्यसभा के उपसभापति एवं सुधी संपादक रहे श्री हरिवंश करेंगे। इस सत्र में सम्पादक, चिंतक और लेखक श्री रामबहादुर राय 'आपातकालः सीख और सबक', सुश्री क्षमा शर्मा 'हिन्दी पत्रकारिता में महिला सहभागिता', श्री दिलीप मंडल 'सोशल मीडिया कितना सोशल', सुश्री खुशबू जैन- 'तकनीकी नवाचार' विषय का विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे। प्रथम सत्र में प्रो. वर्तिका नंदा की पुस्तक 'ज से जेल' तथा दूसरे सत्र में प्रो. प्रमोद कुमार की पुस्तक 'पारखी दृष्टि में समग्र भारतीय पत्रकारिता' का विमोचन होगा।
महोत्सव में दिल्ली स्थित पत्रकारिता एवं जनसंचार विषयक संस्थानों के प्राध्यापक, शोध छात्र एवं विद्यार्थी तथा हिन्दी पत्रकारिता में रुचि रखने वाले सुधी पत्रकार, साहित्यकार, शिक्षाविद एवं सामाजिक सरोकारों से प्रतिबद्ध कार्यकर्ता सहभागिता करेंगे।
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संगोष्ठी: पल – प्रतिपल कार्यक्रम: 31 मई, 2026
प्रथम सत्र (पूर्वाह्न 10.30 से 1.00 बजे तक)
केंद्रीय विषय : हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल : पुनरावलोकन
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष -पत्रकारिता के सरोकार:सरोकारों की पत्रकारिता: इस विषय पर इग्नू, क्षेत्रीय केंद्र - जबलपुर ने आज एक सार्थक विमर्श का आयोजन किया. इसका हिस्सा बनना सुखद रहा.
IGNOU तक यह बात भी पहुंचा पाई कि जल्द ही विमोचित होने वाले मेरे पहले उपन्यास- ज से जेल- में इग्नू IGNOU की महत्वपूर्ण चर्चा है. अपने संवाद में मैं यह भी बता पाई कि मध्यप्रदेश की जेलों की छवि उपन्यास में शामिल है.
मैं Amresh Dwivedi और Pramod Joshi जी का व्याख्यान ही सुन पाई पर भरपूर लाभांवित हुई. इस सफल आयोजन के लिए डॉ. विवेक श्रीवास्तव जी बधाई के पात्र हैं.
स्वागत
11:15 - प्रो.(डॉ.) रमेश यादव :
हिन्दी पत्रकारिता : शुरुआत और सरोकार
11:45 - प्रो.(डॉ.) अमरेश द्विवेदी :
दुनिया जहान से हिन्दी संवाद
12:15 - प्रो.(डॉ.) वर्तिका नंदा :
हिन्दी पत्रकारिता में आधी आबादी की जगह
12:45 - श्री प्रमोद जोशी :
संचार की सहजता और नैतिकता के प्रश्न
01:15 - श्री राजीव कुमार शुक्ल : पत्रकारिता का पक्ष : जनपक्ष
01:45 - डॉ. अमित कुमार : डिजिटल दुनिया की हिन्दी
02:15 - श्री पंकज स्वामी : स्थानीयता और विश्वसनीयता के प्रश्न
करीब साढ़े तेरह साल पहले दूरदर्शन के एक कार्यक्रम- AWAKENING INDIA का हिस्सा बनने का मौका मिला था (Episode 63) . यह मौका परसों दोबारा मिला. Program Executive Anuraag Darshan Anchor Praveen Tiwari और कार्यक्रम के केंद्र में स्वामी विवेकानंद.
आपसे नई औप पुरानी-दोनों तस्वीरें साझा कर रही हूं रिकॉर्डिंग के दौरान और बाद में भी कई विशेष बातें हुईं. मैं यह बता सकी कि तिनका तिनका फाउंडेशन 31 मई को स्थापित हुआ था, वही दिन जब स्वामी जी 1893 में भारत से शिकागो गए थे. उनके ऐतिहासिक उद्बोधन ने भारत की दशा-दिशा बदली.
रिकार्डिंग के बाद मेरे नए उपन्यास- ज से जेल- की कुछ बातें भी हूईं. अनुराग जी और प्रवीण जी के आध्यात्मिक पक्ष से सुंदर साक्षात्कार हुआ.
कुल मिलाकर यह लगा ही नहीं कि इस कार्यक्रम में 13 साल बाद आना हुआ. अनुराग जी ने बहुत शिद्दत से इस कार्यक्रम को सहेजा है. मेरा यह विचार पुख्ता हुआ कि दूरदर्शन और आकाशवाणी की नींव बने प्रस्तोताओं को कभी वह जगह और सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे या हैं. हम यहां चूके हैं. दूरदर्शन और आकाशवाणी भारत की ब्रॉडकास्टिंग के स्तंभ हैं.
अगस्त, 1993. हरियाणा के शहर अंबाला से नई दिल्ली के लिए शताब्दी ट्रेन चल पड़ी है। स्टेशन धीरे-धीरे पीछे छूटता जा रहा है। चलती हुई ट्रेन की खिड़की से रेलवे का हमारा बड़ा सरकारी बंगला भी दिखा है। रेलवे का वह बंगला जहां हम अब तक रह रहे थे। अब यह बंगला यादों में रहेगा। जिंदगी बदलने जा रही है। जो पीछे छूटा, उसमें कहानी-लेखन भी छूटा। चलती ट्रेन में खुद को जैसे वादा किया था कि अगले दो दशक तक विशुद्ध तौर पर पत्रकारिता करनी है। उसके बाद लिखूंगी उपन्यास।
इस वादे को पूरा करने में 20 की बजाय 30 साल लग गए। उपन्यास लिखने का समय आया – अब।
यह उपन्यास क्यों
मेरे अंदर बहुत कुछ भर गया था. उसे कहने के लिए अब जाकर माकूल समय आया। शोर मचाकर खुलने वाले बड़े-बड़े दरवाज़े, उन पर टंगे हुई बड़े और कड़े ताले, अंदर जाते ही सवाल भरी आँखें, देहरी पर हमेशा पसरा रहने वाला कोई नाराज़-सा शोर, बंद गलियारों में बेरंग पतंगों की तरह छिटके हुए लोग। जेलों के कुछ पेड़ों पर बंधे मन्नतों के धागे देखती रही थी। इतना कुछ समेटने के लिए एक उपन्यास ज़रूरी था!
अगर आप जेल को जानना चाहते हैं तो मेरा दावा है कि यह उपन्यास आपको एक नई दृष्टि देगा, आपके नजरिये को बदल देगा.
आभार प्रभात प्रकाशन Prabhat Prakashan इस उपन्यास को इतना सुंदर आकार देने के लिए. जेल की आवाजों को एक सार्थक मंच देने के लिए.
“ टेढ़े-मेढ़े मुरझाए चेहरे इस पलभर की खुशी में नहा रहे थे। पूरी बैरक की इस इकलौती बच्ची पर सभी औरतें अपना प्यार निछावर करती हुईं उसे नाम देती जा रहीं थी। सभी नाम ऐसे थे कि लगता था जैसे वो जेल में रहने वालो के लिए ही रचे गए हों। ” मैं किसकी बात कर रही हूं, क्यों, कहां हैं यह लोग? थोड़ा सा इंतजार कीजिए. एक बड़ी खबर जल्द आपसे साझा की जाएगी. तिनका तिनका की एक और प्रार्थना है यह.
16.5.26 को "हिंदी भवन" विष्णु दिगंबर मार्ग,आईटीओ,नई दिल्ली में सामयिक प्रकाशन द्वारा सुप्रसिद्ध लेखिका "पुष्पा सिंन्हा" के उपन्यास "जेल समाधि" का लोकार्पण हुआ और उपन्यास पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में अध्यक्ष के रूप में प्रख्यात साहित्यकार सविता चड्ढा रहीं। मुख्य अतिथि की रूप में एनडीटीवी की पूर्व प्रस्तोता और LSR कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. वार्तिका नंदा थीं। विशिष्ट अतिथि और वक्ता के रूप में सुप्रसिद्ध आलोचक और कथाकार श्री महेश दर्पण, मुझे और चर्चित लेखक विवेक मिश्र को आमंत्रित किया गया। इस उपन्यास के केंद्र में 7 साल से जेल में रह रहे निर्भय कांड के एक अभियुक्त की एक काल्पनिक आत्मकथा थी। कार्यक्रम का सफल संचालन सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. कविता सिंह प्रभा ने और धन्यवाद ज्ञापन सामयिक प्रकाश के मुखिया श्री महेश भारद्वाज ने किया।
कार्यक्रम में उपस्थित सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री हीरालाल नागर, पुनीता सिंह,अंजू क्वात्रा, कुमार सुबोध, शकुंतला मित्तल,मनोरमा, ज्योति स्वरुप उपाध्याय,वीणा अग्रवाल रहे।
13 May, 2026: Press Release: Premchand’s “Idgah” to be aired today at District
Jail, Dehradun Tinka Jail Paathshala initiative of literature in
prison on Doon Jail Radio
The
objective of this weekly show is to familiarize inmates with literature
and society, and offer meaningful engagement for their free time.
This
initiative has been jointly undertaken by Dehradun District Jail and the
Tinka Tinka Foundation.
It
will mark a new chapter of the Tinka Jail Paathshala.
Two
women inmates of the jail have been entrusted with the responsibility of
narrating the story.
Audio
editing will be done by Dr. Suchit Narang, who was previously released
from the same jail.
This
announcement has been made to mark 3 years ofagreements signed
between District Jail Dehradun and the Tinka Tinka Foundation, with the
aim of establishing this jail as a model prison from the perspective of
communication, podcasting and research.
Literature to Take Center Stage on Dehradun Jail Radio
Starting Today
Today, Mehak and Deepika, both lodged in District Jail,
Dehradun have been summoned to the Jail Radio room for a very special reason.
Deepika is serving a life sentence, while Mehak is currently an undertrial
prisoner.
The reason for summoning them is the launch of a brand-new
program on the prison's radio station. Both women have been actively involved
with the jail radio for several days. They have now been selected to lead a new
segment titled: "Literature in Jail" (Jail Mein Sahitya).
Special arrangements for women inmates
This jail has a capacity of 40 women inmates; however, it
usually houses around 50. Doon Jail Radio was launched in 2021 through a joint
initiative of the District Jail Dehradun and the Tinka Tinka Foundation. At
that time, it was not possible for women inmates to present programs on the
radio.
Later, the jail administration made arrangements to include
them as well. A recorder was provided so that they could record their programs
and send them to the male section, where the jail radio is located.
Literature in Jail
Now, under a new initiative, they will work on literary
programs in the jail. This was announced by Deputy Inspector General of
Uttarakhand Prisons, Dadhi Ram Maurya, Jailor Pavan Kothari, and Professor
Vartika Nanda, founder of the Tinka Tinka Foundation. This is a new kind of
initiative in India.
Objective of the Program and Tinka Jail Paathshala
The aim of this initiative is to familiarize inmates with
literature and society, to provide meaningful avenues to spend their free time,
and to encourage them towards reading and writing. The period from 1947 to 1980
was particularly rich for Hindi literature. During this time, movements such as
Nayi Kahani, Nayi Kavita, and the Progressive movement gave a new
direction to Hindi literary traditions. Through readings of such works in the
jail, efforts will be made to create a more positive environment in the prison.
This program will be broadcast daily for five minutes. It
will include readings from the works of writers such as Bharatendu
Harishchandra, Munshi Premchand, Dharamvir Bharati, Rahi Masoom Raza, Nirmal
Verma, Jainendra Kumar, Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Agyeya', Phanishwar
Nath 'Renu', Mohan Rakesh, Harishankar Parsai, as well as women writers like
Krishna Sobti, Shivani, and Mannu Bhandari. In the initial phase, the readings
will be conducted by Deepika and Mehak. The first story for this segment is Idgaah
written by Munshi Premchand.
A visually impaired former inmate will edit the stories
In 2021, this jail radio was envisioned by Professor Vartika
Nanda, founder of the Tinka Tinka Foundation. With the support of Dadhi Ram
Maurya (Deputy Inspector General) and Pawan Kothari (Jailor), the jail radio
took concrete shape.
At that time, 14 inmates were selected as radio jockeys, led
by Suchit Narang. He is a visually impaired individual who, before his
imprisonment, worked as a music teacher. Along with him, Arun and Rohit helped
manage the jail radio.
Today, Dr. Suchit Narang has been released from jail, but
his association with the jail radio continues. He will be responsible for
editing the storytelling segments. He had also composed the signature tune of
the jail radio in 2023.
Impact of Jail Radio
The radio has brought a significant change in the
environment of the jail. Initially, the jail radio was limited only to male
inmates, but gradually its reach was extended to women inmates as well. The
jail administration believes that the radio has infused a strong sense of
positivity into the prison atmosphere.
Achievements of Jail Radio
Since its inception, Doon Jail Radio has been serving as a
medium of communication and emotional comfort for inmates. A regional
conference was organized in Dehradun jointly by the Uttarakhand Legal Authority
and National Legal Services Authority (NALSA) in April this year. The
conference was inaugurated by the Chief Justice of India, Shri Surya
Kant. Professor Vartika Nanda presented the journey of the jail radio
initiative introduced in Uttarakhand prisons before judges from across North
India.
Tinka Research Cell to Conduct Studies
The Tinka Tinka Research Cell was established in 2021.
During this period, several studies were conducted on Dehradun Jail Radio in
Uttarakhand, including assessments of the need for music within the prison
environment.
On 13 May, 2023, three agreements were signed between
District Jail Dehradun and the Tinka Tinka Foundation, with the aim of
establishing this jail as a model prison from the perspective of communication,
podcasting and research.
In 2024, the jail was also prominently mentioned in the book
Radio in Prison, published by the National Book Trust.
Similarly, Doon Jail Radio received special mention at
international conferences held in Spain in 2023 and in Norway in 2022.
13 May, 2026: प्रेस
विज्ञप्ति: जिला जेल, देहरादून पर आज सुनाई देगी प्रेमचंद की ईदगाह
दून जेल रेडियो पर-जेल में साहित्य- तिनका जेल
पाठशाला की नई पहल
मकसद-बंदियों को साहित्य और समाज से अवगत
करवाना, उनके खालीसमय का
सार्थक उपयोग
इसकी नींव जिला जेल देहरादून और तिनका तिनका
फाउंडेशन ने मिलकर रखी है
तिनका जेल पाठशाला का यह नया अध्याय होगा
जेल की दो महिला बंदिनियों को कथा वाचन की
जिम्मेदारी सौंपी गई है
ऑडियो संपादन इसी जेल से रिहा हुए डॉ. सुचित
नारंग करेंगे
यह घोषणाजिला जेल, देहरादून और तिनका तिनका के बीच 13 मई, 2023 को हुए तीन करारों के तीन साल पूरे होने के
अवसर पर की गई है जिनका मकसद इस जेल को एक मॉडल जेल के तौर पर स्थापित करना
है.
देहरादून जेल रेडियो पर आज से जमेगी
साहित्य की महफिल
जिला जेल, देहरादून की महिला बैरक से आज महक और दीपिका को एक खास वजह से जेल
रेडियो के रूम में बुलाया गया है। इस जेल में निरुद्ध दीपिका आजीवन कारावास पर है
जबकि महक विचाराधीन बंदिनी है। इन दोनों को यहां बुलाए जाने की वजह है- जेल के
रेडियो पर शुरू होने वाला एक नया कार्यक्रम। यह दोनों बंदिनियां पिछले कई दिनों से
जेल के रेडियो के साथ जुड़ी हैं. इन दोनों का चयन इस जेल रेडियो के नए कार्यक्रम-
जेल में साहित्य के लिए किया गया है.
महिला बंदिनियों के लिए विशेष
व्यवस्था
इस जेल मेंमहिला बंदिनियों की क्षमता40
है. अमूमन यहां 50 के आस-पास बंदिनियां रहती हैं. दून जेल रेडियो की शुरुआत 2021 में तिनका तिनका फाउंडेशन और जिला जेल देहरादून
ने मिलकर की थी. तब महिलाओं के लिए इस रेडियो पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर पाना संभव
नहीं था लेकिन बाद में जेल प्रशासन ने इसकी व्यवस्था भी कर दी. एक रिकॉर्डर का
इंतजाम हुआ ताकि वे अपने कार्यक्रमों को रिकॉर्ड करके पुरुष सेक्शन तक भेज सकें
जहाँ पर जेल का रेडियो स्थापित है.
जेल में साहित्य
अब एक नए बदलाव के तहत वे जेल के
साहित्यिक कार्यक्रमों पर काम करेंगी। इस बात की घोषणाउत्तराखंड जेल के उप महानिरीक्षक दधी राम मौर्य,
जेलर पवन कोठारी और प्रोफेसर वर्तिका नंदा,
संस्थापक तिनका तिनका फाउंडेशन ने की. यह भारत
में एक नई तरह की पहल है।
कार्यक्रम का मकसद और तिनका जेल
पाठशाला
इस पहल का मकसद है-बंदियों को
साहित्य और समाज से अवगत कराना, उनके
खाली समय में सार्थकता भरना और उन्हें लेखन और पाठन के लिए प्रोत्साहित करना.
1947 से 1980 का कालखंड हिंदी साहित्य के लिए बेहद समृद्ध रहा है। इस दौरान
'नई कहानी', 'नई कविता' और 'प्रगतिशील' आंदोलनों ने हिंदी साहित्य को नई
दिशा दी। इस दौर में लेखकोंने
अपनी लेखनी से समाज, रिश्तों और स्त्री चेतना को गहराई और
संवेदना से उकेरा। इस साहित्य के वाचन के जरिए जेल का वातावरण बेहतर बनाने की
कोशिश की जाएगी.
इस कार्यक्रम का प्रसारण हर रोज
5 मिनट के लिए किया जाएगा। इनमें भारतेंदु
हरिश्चंद्र, प्रेमचंद,धर्मवीर भारती, राही
मासूम रजा, निर्मल वर्मा, जैनेंद्र कुमार, अज्ञेय,
फणीश्वर नाथ 'रेणु’, मोहन राकेश, हरिशंकर परसाई आदि लेखकों और कृष्णा सोबती, शिवानी, मन्नू भंडारी जैसी लेखिकाओं की
कृतियों का वाचन होगा. शुरुआती दिनों में यह वाचन दीपिका औऱ महक करेंगी.इस कड़ी में पहली कहानी है- प्रेमचंद की कहानी-
ईदगाह.
जेल से रिहा एक नेत्रहीन बंदी करेंगे
कहानियों का संपादन
2021 में प्रोफेसर वर्तिका नंदा, संस्थापक, तिनका तिनका फाउंडेशनने इस
जेल रेडियो की परिकल्पना की थी। श्री दधी राम मौर्य, उप महानिरीक्षक, श्री
पवन कोठारी, जेलर और के सहयोग से जेल रेडियो
साकार रूप ले सका। तब 14 बंदियों
का रेडियो जॉकी के तौर पर चयन किया गया था जिनकी अगुवाई डॉ. सुचित नारंग ने की थी।
वे एक नेत्रहीन बंदी हैं और जेल में आने से पहले संगीत के शिक्षक थे। उनके साथ
अरुण और रोहित ने जेल रेडियो की कमान संभाली। आज डॉ. सुचित नारंग जेल से रिहा हो
गए हैं, लेकिन जेल रेडियो के लिएउनका सहयोग बरकरार है। वही इस
कथावाचन का संपादन करेंगे. उन्होंने 2023 में
जेल रेडियो के सिग्नेचर ट्यून को बनाया था.
जेल रेडियो का प्रभाव
रेडियो की वजह से जेल के वातावरण में
साफ तौर पर बहुत बदलाव आया है। शुरुआत में जेल का रेडियो सिर्फ पुरुष बंदियों तक
सीमित था लेकिन धीरे-धीरे इसकी पहुँच महिला बंदिनियों तक की गई। जेल प्रशासन मानता
है कि रेडियो ने जेल के माहौल में जबरदस्त सकारात्मकता भर दी है.
जेल रेडियो की कुछ उपलब्धियां
दून जेल रेडियो अपनी शुरुआत से ही
बंदियों के लिए संवाद और भावनात्मक सुकून का जरिया बन रहा है.अप्रैल में उत्तराखंड लीगल अथॉरिटी और नालसा ने
मिलकर देहरादून में एक क्षेत्रीय कान्फ्रेंस का आयोजन किया था। उसका उद्घाटन भारत
के मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांतने
किया था। इस कॉन्फ्रेंस में वर्तिका नंदा ने उत्तराखंड की जेल में लाए गए रेडियो
की यात्रा को उत्तर भारत के न्यायाधीशों के सामने प्रस्तुत किया था.
तिनका रिसर्च सेल करेगा शोध
2021 में तिनका तिनका रिसर्च सेल की
स्थापना हुई थी। इस दौरान उत्तराखंड की देहरादून जेल रेडियो पर भी कई तरह के शोध
किए गए जिससे जेल में संगीत की जरूरतों का भी आकलन किया गया। 13 मई, 2023 को
जिला जेल, देहरादून और तिनका तिनका के बीच तीन
करार किए गए थे जिनका मकसद इस जेल को एक मॉडल जेल के तौर पर स्थापित करना है.2024 में नेशनलबुक ट्रस्ट से आई किताबरेडियो इन प्रिजनमें भी इस जेल का विशेष उल्लेख किया गया है। इसी
तरह 2023 में स्पेन और 2022 में नार्वे में हुई अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस
में भी दून जेल रेडियो का विशेष जिक्र किया गया था.
YouTube: Episode on Premchand: 13 May, 2026
In Press:
Woman’s Era: Premchand’s “Idgah” aired today at District
Jail, Dehradun: Tinka Jail Paathshala Initiative - Woman's era Magazine
ABP News: जिला कारागार देहरादून में जब सुनाई
दी प्रेमचंद की ईदगाह, जुड़ गया तिनका जेल पाठशाला का नया
अध्याय | Jila jail dehradun Tinka Tinka Foundation organise program for
prisoners Premchand ki Idgah
Dainik Tribune: बंदियों
के जीवन में साहित्य का सुकून - dainiktribuneonline.com
FB LINK: Dainik Tribune: Naresh Kaushal - जेल में जब भारतेंदु हरिश्चंद्र, धर्मवीर भारती,... | Facebook
10 May, 2026: NCW Chairperson Vijaya Rahatkar जी की इस पोस्ट को बेहद खुशी के साथ साझा कर रही हूं. पहले इस तस्वीर की कहानी.
थी.हूं..रहूंगी… 2012 में राजकमल प्रकाशन से छपी मेरी किताब का शीर्षक है और यह तस्वीर उसका कवर. किताब दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में रिलीज हुई थी. मुख्य अतिथि थे- प्रोफेसर नामवर सिंह. बाद में पटना में जावेद अख्तर ने इसे रिलीज किया. देश के कई राज्यों में इस पर संवाद हुआ.
पर एक बात जो सोशल मीडिया पर कम ही बताई गई लेकिन तिनका तिनका के दस्तावजों का हिस्सा रही, वह है- इस कवर को देश की कई जेलों की दीवारों पर उकेरा जाना. इनमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और जिला जेल आगरा शामिल हैं.
अब इस तस्वीर की बात. यह तस्वीर दिल्ली की तिहाड़ जेल नंबर 6 (महिला जेल) में अंकित है. इसे 2024 में जेल की बंदिनियों से पेंट किया. तिनका तिनका तिहाड़ का नाम लिखा गया क्योंकि यह पहचान तिहाड़ के साथ 2013 से जुड़ी है.
यह भी कहना जरूरी है कि इस पर तिनका तिनका फाउंडेशन का कॉपीराइट है और यह कई जिंदगियों के लिए हिम्मत का मंत्र बना है. उन जिंदगियों में खुद मैं भी शामिल हूं.
NCW Chairperson का आभार. साथ ही तिहाड़ जेल के पूर्व महानिदेशक श्री संजय बेनीवाल और मौजूदा महानिदेशक श्री आनंद मोहन का आभार. जेल नंबर 6 की मौजूदा सुपरिटेंडेंट अमृता जी भी कृतज्ञता की हकदार हैं और साथ ही समूचा जेल स्टाफ. आज 2024 की एक तस्वीर भी यहां पर लगा रही हूं.
9 मई, 2026: दिल्ली: आज तिहाड़ जेल का दौरा कर महिला बंदियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, कल्याणकारी उपायों, पुनर्वास पहलों तथा उनकी रहने की परिस्थितियों की समीक्षा की। इस अवसर पर महानिदेशक (कारागार) श्री आनंद मोहन, उपमहानिरीक्षक श्री कुलदीप सिंह, अधीक्षक सुश्री अमिता सुमन आदि अधिकारी उपस्थित थे।
निरीक्षण के दौरान जेल परिसर के विभिन्न भागों का व्यापक दौरा किया, जिसमें महिला बंदियों के बैरक एवं सेल, महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए क्रेच सुविधा, फैशन लैब, सिलाई एवं कौशल प्रशिक्षण केंद्र, डिजिटल लर्निंग रूम, मनोरंजन सुविधाएँ, रसोईघर, चिकित्सा सुविधाएँ तथा परामर्श कक्ष शामिल थे।
महिला बंदियों से भी संवाद कर जेल में संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। विशेष रूप से महिला बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा, परामर्श एवं मानसिक स्वास्थ्य सहायता के माध्यम से सशक्त बनाकर उनके सामाजिक पुनर्वास को सुनिश्चित करने की पहल पर बल दिया गया।
महिला बंदियों के लिए कौशल आधारित प्रशिक्षण एवं कल्याणकारी सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी महिला बंदियों की गरिमा, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई।
कारागार सुधारों के दृष्टिकोण से तिहाड़ एक आदर्श जेल के रूप में कार्य कर रहा है।