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Jul 8, 2008

मीडिया नगरी

किताब में पढ़ लिया
और तुमने मान भी लिया
कि मीडिया सच का आईना है !

तुमने जिल्द पर शायद देखा नहीं
वो किताब तो पिछली सदी में लिखी गई थी
तब से अब तक में 'सच' न जाने कितनी पलटियां ले चुका
और तुम अभी भी यही मान रही हो
कि मीडिया सच को दिखाता है !

सुनो
नई परिभाषा ये है कि
मीडिया सच पर नहीं
टीआरपी पर टिका है

पर एक सच और है

मीडिया मजबूर है
और जो खुद मजबूर है
वो तुम्हें रास्ता क्या-कैसे दिखाए

हां, तुम ठीक कहती हो
हम-तुम दोनों मिलकर एक नए मीडिया की तलाश करते हैं
बोलो, मंगल पर चलें या प्लूटो पर
अब यह तो तुम ही तय करो
लेकिन सुनो
वक्त गुजारने के लिए
ये सपना अच्छा है न!

4 comments:

bhuvnesh sharma said...

मेरे ख्‍याल में अंग्रेजी मीडिया टीआरपी की भागदौड़ में भी अपना स्‍तर बनाये हुए है....बाकी हिंदी मीडिया का तो भगवान ही मालिक है

sushant jha said...

अद्भुत है...दिव्य है...अगले पोस्ट का इंतजार रहेगा।
सुशांत
www.amrapaali.blogspot.com

cartoonist ABHISHEK said...

ठीक कहना है आपका
नए मीडिया की तलाश में
मंगल या प्लूटो पर ही जाना पड़ेगा..

brijesh dubey said...

kavita likh kar logon ki daad pana asan hai.Halanki mai samajhta hoon ki apka maqsad yah nahi hoga. kya apko nahi lagta, kavita likhna is waqt dunia me sabse garjaroori kam hai. kuchh nahi badalta inse. yahi sachchai hai aur yahi hamare jaise aam logo aur aap jaise kaviyon ka durbhagya...
brijes