आज भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष: विरासत से नवाचार तक” के अंतर्गत आयोजित सत्र - भाषा, शैली और रिपोर्टिंग के ऐतिहासिक परिवर्तन- की अध्यक्षता करने का सुंदर अवसर मिला. 1993 से लाकर अब तक इस संस्थान से जुड़ी अनगिनत यादें ताजा हो गईं. 2003 से 2006 तक बतौर एसोसिएट प्रोफेसर और यहीं से प्रकाशित पुस्तक- टेलीविजन और अफराध पत्रकारिता- को भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार मिला था. आज के आयोजन के लिए संस्थान की कुलपति डॉा. प्रज्ञा पीलावाल गौड़, डॉ. रचना शर्मा और डॉ. मीता उज्जैन का विशेष आभार.
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