जेल से रिहाई पाने का मतलब पूरी आजादी पा लेना नहीं होता. कई बार जेल पूरी जिंदगी पीछा नहीं छोड़ती. 2015 से जिस सुरिंदर कोली को मैं अक्सर जिला जेल, गाजियाबाद (डासना) में मिलती थी, वो एक दूसरा कोली था जो 2023 में अपनी रिहाई आते-आते फिर से बदल चुका था.
उसका जिक्र दो जगह विस्तार से है- एक, तिनका तिनका डासना (2016, तिनका तिनका फाउंडेशन) और दूसरी, ज से जेल (2026- प्रभात प्रकाशन)

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