।।।शुक्रिया दैनिक ट्रिब्यून।।।
साल 1987। दैनिक ट्रिब्यून में जालंधर दूरदर्शन पर एंकर किए जाने वाले बच्चों के कार्यक्रम पर कई सुंदर टिप्पणियां. 1988 और 1990 में रविवारीय पेज पर बड़े इंटरव्यू, 1993 में मेरी लिखी कहानी- सितारों भरा आशमान- को दैनिक ट्रब्यून की कहानी प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार, 2013 से आज तक तिनका तिनका पर अनगिनत स्टोरीज, 2025 में अखबार के इतिहास में पहली बार किसी जीवित व्यक्ति पर एक पूरे पेज की कवरेज। इसी दैनिक ट्रिब्यून में आज यादों का बड़ा पिटारा खोलने और संवाद का अनूठा अवसर मिला। शुक्रिया संपादक Naresh Kaushal जी की आपने मुझए इस सम्मान के योग्य समझा। मीनाक्षी लेखी जी, अरुण नैथानी जी और केवल जी समेत चैनिक ट्रिब्यन के कई पत्रकारों से सारगर्भित संवाद हो सका। चंडीगढ़ प्रवास सार्थक हुआ।
नरेश सर आज से अपनी एक नई पारी शुरु कर रहे हैं। उनके लिए असीम शुभकामनाएं।


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