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Television aur Crime Reporting: 2010: Vartika Nanda

Jul 1, 2010

हम लोग


चिड़िया की खुशी का विस्तार
उसके आकार से होता है कहीं ज्यादा
लाल बत्ती होने के सेकेंड भर पहले
पार कर ली सड़क
खुश हो लिए
पानी जाने से पहले बचा लिया बालटी में
भोर तक के लिए पानी
सेल खत्म होने के ठीक पहले
खरीद ली
हमेशा मांगती ननद के लिए साड़ी
बेटे के लिए चमकती नकली कार
सिलेंडर खत्म होने से ठीक पहले बना लिया खाना
जोड़ ली ताकत रात में फिर से पति से पिटने के लिए

चिड़िया इसी बचत में पूरी उम्र गुजार जाती है
चिडिया कब जानती है
भेड़िया तो यही चाहता है
चिड़िया की चाहतों का संसार
उसकी फुदकन जितना ही हो
लेकिन जरूरी नहीं
कि भेड़िया भी हमेशा सही ही हो

5 comments:

राजेश उत्‍साही said...

वर्तिका जी आप अपनी कविता में इतना चौंकाती क्‍यों हैं। बहरहाल कविता बहुत कुछ कहती है।

स्वाति said...

aapki kavita achhi lagi vartika ji...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

ek badhiya rachna......satya ke kareeeb!!

संजय पाराशर said...

कि हमेशा भेड़िया सही ही हो.....
thik....

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर और संवेदनशील रचना है, बेहतरीन! देर से आने के लिए माफ़ी