“ टेढ़े-मेढ़े मुरझाए चेहरे इस पलभर की खुशी में नहा रहे थे। पूरी बैरक की इस इकलौती बच्ची पर सभी औरतें अपना प्यार निछावर करती हुईं उसे नाम देती जा रहीं थी। सभी नाम ऐसे थे कि लगता था जैसे वो जेल में रहने वालो के लिए ही रचे गए हों। ” मैं किसकी बात कर रही हूं, क्यों, कहां हैं यह लोग? थोड़ा सा इंतजार कीजिए. एक बड़ी खबर जल्द आपसे साझा की जाएगी. तिनका तिनका की एक और प्रार्थना है यह.

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