Jul 7, 2026

तिनका जेल पाठशाला: 17 जुलाई, 2026


17 जुलाई, 2026
क्या आप खुद हमेशा उदास रहते हैं ?  क्या आप यह तय नहीं कर पाते कि दुनिया सुंदर है या बदसूरत?   कि इस दुनिया में किसी पर आपका भरोसा क्यों कायम नहीं हो पा रहा  या फिर कि सफलता के पैमाने क्या हैं ?  अगर आप भी इन सवालों से जूझ रहे हैं तो चलिए हमारे साथ जेल की एक अनूठी यात्रा पर और महसूस कीजिए खुद में ऐसे बदलाव जो आपकी दिशा को शायद पूरी तरह से बदल दें. 



 

एक धुंध से आना है, एक धुंध में जाना है: Sahir Laudhianvi: Vartika Nanda

 संसार की इस शाह का बस एक ही फसाना है एक धुंध से आना है, एक धुंध में जाना है। 

बी. आर. चोपड़ा की फिल्म 'धुंध' 1973 में आई थी।

साहिर साहब ने जब इस गाने को लिखा होगा, उस समय 

उनके अपने दिल की टीस, दर्द और कसक किसी गहराई तक रही होगी। दुनिया में पाठक होते हैं, दर्शक हो,  श्रोता और राहगीर भी और कुछ ऐसे होते हैं जो दर्द के बीच में जीते हुए रोज़ किसी धागे से किसी चीज़ को बुनते हैं, उधेड़ते हैं और फिर बुनने लग जाते हैं। उदास दिल का साहिर, एक उदास अमृता, एक उदास इमरोज और ऐसे ही बहुत से और उदास शायर, गीतकार, फनकार इन सब ने अपनी उदासियों के बीच में कुछ ऐसा गढ़ा कि फिर वो कभी मिट ना पाया। साहिर का ये गाना उसी की एक मिसाल है।

Poster: Jagtar Singh        Audio Edit: Dr. Suchit Narang